
शिवम,रिपोर्टर,पीटीएन
खाड़ी क्षेत्र में बढ़ते युद्ध के हालात का असर अब वैश्विक अर्थव्यवस्था पर भी दिखाई देने लगा है। अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमतों में तेज उछाल दर्ज किया गया है और इसकी कीमत करीब 92 डॉलर प्रति बैरल तक पहुंच गई है।
कच्चे तेल की कीमतों में इस तेजी से भारत समेत कई देशों में महंगाई बढ़ने की आशंका जताई जा रही है। यूनिक ग्रुप के चेयरमैन विनोद घई का कहना है कि यदि खाड़ी क्षेत्र में तनाव लंबे समय तक जारी रहता है तो ऊर्जा बाजार में अस्थिरता और बढ़ सकती है।
उन्होंने कहा कि भारत जैसे देश, जो अपनी तेल जरूरतों का बड़ा हिस्सा आयात के जरिए पूरा करते हैं, उनके लिए यह स्थिति चुनौतीपूर्ण हो सकती है। कच्चे तेल की कीमतों में बढ़ोतरी का सीधा असर पेट्रोल और डीजल के दामों पर पड़ता है।
ईंधन की कीमतें बढ़ने से परिवहन और उत्पादन की लागत भी बढ़ जाती है, जिससे बाजार में आने वाली लगभग हर वस्तु की कीमत प्रभावित होती है। विशेषज्ञों का मानना है कि आने वाले समय में कच्चे माल की कीमतों में भी बढ़ोतरी देखने को मिल सकती है, जिससे उद्योगों की लागत बढ़ेगी और इसका असर आम उपभोक्ताओं पर पड़ेगा।
इसके अलावा कच्चे तेल के महंगे होने से प्लास्टिक, केमिकल और स्टील जैसे कई उद्योगों पर दबाव बढ़ने की संभावना है। उद्योग प्रतिनिधियों का कहना है कि यदि यह स्थिति लंबे समय तक बनी रहती है तो उत्पादन में कमी और कीमतों में बढ़ोतरी देखने को मिल सकती है।
Author: punjabtimesnow
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