
-दिनदहाड़े लूट से लेकर रात के सेंधमारी तक, रेकी, सुरक्षा की कमी और कैश फ्लो ने बनाया बैंक को ‘सॉफ्ट टारगेट’
✍🏻 सत्यम, रिपोर्टर, पीटीएन
जालंधर में हाल ही में पंजाब नेशनल बैंक (पीएनबी) में हुई दिनदहाड़े लूट ने एक बार फिर सुरक्षा व्यवस्था पर बड़े सवाल खड़े कर दिए हैं। बैंक एन्क्लेव इलाके के पास स्थित पंजाब नेशनल बैंक की शाखा में दो युवकों ने पिस्टल के दम पर कैशियर से नकदी लूट ली और कुछ ही मिनटों में फरार हो गए। घटना का सीसीटीवी फुटेज सामने आने के बाद पुलिस हरकत में है, लेकिन इस वारदात ने एक अहम सवाल खड़ा कर दिया है कि आखिर बार-बार यही बैंक क्यों निशाने पर आ रहा है?
दरअसल, जालंधर और आसपास के इलाकों में पिछले कुछ वर्षों के दौरान बैंक लूट और चोरी की कई घटनाएं सामने आई हैं, जिनमें पंजाब नेशनल बैंक की शाखाएं भी शामिल रही हैं। कभी दिनदहाड़े हथियार के दम पर लूट, तो कभी रात के अंधेरे में एटीएम या स्ट्रॉन्ग रूम को निशाना बनाया गया। हर घटना के बाद पुलिस जांच शुरू होती है, लेकिन लुटेरों के तरीके लगातार बदलते जा रहे हैं।
विशेषज्ञों की मानें तो इस तरह की घटनाओं के पीछे सबसे बड़ा कारण है बैंक की लोकेशन और संरचना। PNB की कई शाखाएं ग्रामीण या शहर के बाहरी इलाकों में स्थित हैं, जहां भीड़भाड़ कम होती है और पुलिस की पहुंच में थोड़ा समय लग जाता है। ऐसे में अपराधियों के लिए वारदात को अंजाम देना और फरार होना अपेक्षाकृत आसान हो जाता है।
दूसरा बड़ा कारण है कैश का ज्यादा फ्लो। पंजाब नेशनल बैंक में सरकारी योजनाओं, किसानों की सब्सिडी, पेंशन और अन्य भुगतान के चलते अक्सर भारी मात्रा में नकदी मौजूद रहती है। यही वजह है कि लुटेरे इसे ‘हाई रिटर्न टारगेट’ मानते हैं, कम समय में ज्यादा रकम हासिल करने का मौका।
तीसरा और सबसे चिंताजनक पहलू है सुरक्षा में कमी। कई मामलों में सामने आया है कि कुछ शाखाओं में न तो स्थायी सुरक्षा गार्ड होते हैं और न ही आधुनिक सुरक्षा उपकरण। सीसीटीवी कैमरे तो लगे होते हैं, लेकिन उनकी लाइव मॉनिटरिंग नहीं होती। हालिया जालंधर लूट में भी यही सामने आया कि घटना के समय बैंक में कोई गार्ड मौजूद नहीं था।
इतना ही नहीं, कई बार रेकी और अंदरूनी जानकारी की भूमिका भी सामने आती है। अपराधी वारदात से पहले कई दिनों तक बैंक के आसपास घूमकर उसकी गतिविधियों पर नजर रखते हैं, किस समय कैश ज्यादा होता है, कब स्टाफ कम रहता है और सुरक्षा व्यवस्था कितनी मजबूत है। कुछ मामलों में यह भी आशंका जताई जाती है कि लुटेरों को अंदर से जानकारी मिलती है, जिससे वे सटीक समय पर वारदात को अंजाम देते हैं।
हालांकि, यह कहना गलत होगा कि सिर्फ पंजाब नेशनल बैंक ही लुटेरों के निशाने पर है। अन्य बैंक भी ऐसी घटनाओं से अछूते नहीं हैं, लेकिन PNB की व्यापक मौजूदगी और ग्रामीण क्षेत्रों में फैला नेटवर्क इसे ज्यादा संवेदनशील बना देता है।
इस पूरी तस्वीर को देखें तो साफ है कि समस्या किसी एक बैंक तक सीमित नहीं है, बल्कि पूरे बैंकिंग सिस्टम की सुरक्षा व्यवस्था को मजबूत करने की जरूरत है। अगर समय रहते सुरक्षा उपायों को अपडेट नहीं किया गया, तो ऐसे ‘आसान निशाने’ अपराधियों को लगातार आकर्षित करते रहेंगे।
फिलहाल, जालंधर की ताजा घटना ने यह जरूर साबित कर दिया है कि अगर सुरक्षा में ढिलाई रही, तो अगला निशाना कौन होगा, यह कहना मुश्किल नहीं।
Author: punjabtimesnow
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