मुंबई पुलिस और CBI अधिकारी बनकर साइबर ठगों ने 73 वर्षीय रिटायर्ड बुजुर्ग को बनाया निशाना, डर और वीडियो निगरानी के बहाने खाते खाली करवाए
✍🏻 सत्यम, रिपोर्टर, पीटीएन
- 📰साइबर अपराधियों द्वारा किए जा रहे ‘डिजिटल अरेस्ट’ के मामलों में एक और चौंकाने वाला मामला सामने आया है। अशोक नगर के 73 वर्षीय रिटायर्ड बुजुर्ग हरविंदर सिंह, जो पीडब्ल्यूडी से रिटायर्ड हैं, साइबर ठगों के जाल में फंसकर 7 दिनों तक मानसिक प्रताड़ना झेलते रहे और अपने बेटे को कथित कानूनी कार्रवाई से बचाने के लिए ₹72.50 लाख गंवा बैठे।
- पीड़ित हरविंदर सिंह के अनुसार, उन्हें एक अनजान नंबर से कॉल आया। कॉल करने वाले ने खुद को मुंबई पुलिस क्राइम ब्रांच का अधिकारी बताया और कहा कि उनके बेटे के खाते में संदिग्ध लेन-देन हुआ है। इसके बाद कॉल कथित तौर पर CBI अधिकारी को ट्रांसफर की गई, जिसने मनी लॉन्ड्रिंग केस और गिरफ्तारी का डर दिखाकर पैसे ट्रांसफर करने के लिए दबाव बनाया।
- ठगों ने हरविंदर सिंह को निर्देश दिया कि वे घर से बाहर न निकलें और किसी से बात न करें। वीडियो कॉल के जरिए लगातार निगरानी का माहौल बनाकर उन्हें ‘डिजिटल अरेस्ट’ में रखा गया। डर के कारण हरविंदर सिंह और उनकी पत्नी परिवार के कार्यक्रमों तक में शामिल नहीं हुए।
- इसी दौरान ठगों ने अलग-अलग बैंक खातों में कुल ₹72.50 लाख ट्रांसफर करवा लिए। मामला तब खुला जब अमेरिका में रहने वाले उनके बेटे का एक दोस्त घर पहुंचा और स्थिति समझने के बाद बैंक अधिकारियों से जांच करवाई। जांच में सामने आया कि रकम किसी सरकारी एजेंसी के खाते में नहीं, बल्कि साइबर ठगों के खातों में भेजी गई थी।
- हरविंदर सिंह ने मामले की शिकायत पुलिस को दे दी है और जांच जारी है।
*साइबर विशेषज्ञ की सलाह*
- साइबर विशेषज्ञ मुकेश चौधरी के अनुसार, कोई भी पुलिस, CBI, ED या अन्य सरकारी एजेंसी वीडियो कॉल पर पूछताछ नहीं करती और न ही किसी “सेफ अकाउंट” में पैसे ट्रांसफर करने के लिए कहती है। ऐसी कॉल मिलने पर तुरंत फोन काटें, परिवार को जानकारी दें और नजदीकी पुलिस स्टेशन या साइबर हेल्पलाइन 1930 पर शिकायत करें।
Author: punjabtimesnow
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