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हॉस्टल में छिपा था आतंकी नेटवर्क: क्या है पूरा मामला जानिए सिर्फ पीटीएन पर 📢

✍🏻 सत्यम, रिपोर्टर, पीटीएन 

मोहाली/जालंधर:

  • 📰:-वर्ष 2018 में जालंधर की एक निजी यूनिवर्सिटी के हॉस्टल से गिरफ्तार किए गए तीन कश्मीरी युवकों को एनआईए की विशेष अदालत ने 10-10 वर्ष के कठोर कारावास की सजा सुनाई है। अदालत ने तीनों दोषियों पर 1.10 लाख रुपये का जुर्माना भी लगाया है। तीनों पर आतंकी संगठन अंसार गजवत-उल-हिंद (AGH) से जुड़े होने और देश विरोधी गतिविधियों की साजिश रचने के आरोप साबित हुए हैं।
  • दोषियों की पहचान जाहिद गुलजार, यासिर रफीक भट और मोहम्मद इदरीस शाह के रूप में हुई है। मामले में आरोपी सुहैल अहमद भट को पहले ही सबूतों के अभाव में बरी किया जा चुका है। उल्लेखनीय है कि जाहिद गुलजार कुख्यात आतंकी जाकिर मूसा का चचेरा भाई बताया जाता है।

 *2018 में हॉस्टल पर पड़ा था छापा*

  • यह मामला 10 अक्टूबर 2018 को सामने आया था, जब खुफिया एजेंसियों को सूचना मिली कि जालंधर की एक निजी यूनिवर्सिटी में पढ़ रहे कुछ कश्मीरी छात्र संदिग्ध गतिविधियों में शामिल हैं। सूचना के आधार पर पंजाब पुलिस और जम्मू-कश्मीर पुलिस के स्पेशल ऑपरेशन ग्रुप (SOG) ने संयुक्त कार्रवाई करते हुए यूनिवर्सिटी हॉस्टल में छापा मारा था।
  • ऑपरेशन को पूरी तरह गोपनीय रखा गया था। सुरक्षा एजेंसियों ने हॉस्टल को चारों ओर से घेरकर संदिग्ध छात्रों के कमरों की तलाशी ली और तीनों युवकों को गिरफ्तार कर लिया। उस समय हॉस्टल में मौजूद अधिकांश छात्रों को शुरुआत में लगा कि यह सामान्य जांच है, लेकिन बाद में आतंकी गतिविधियों से जुड़े खुलासों ने सभी को चौंका दिया।

*हथियार और विस्फोटक मिलने से बढ़ी थी चिंता* 

  • जांच के दौरान सुरक्षा एजेंसियों को आरोपियों के कब्जे से एके-47 राइफल, पिस्तौल और विस्फोटक सामग्री बरामद हुई थी। अधिकारियों को आशंका थी कि इन हथियारों का इस्तेमाल पंजाब समेत देश के अन्य हिस्सों में किसी बड़ी आतंकी वारदात को अंजाम देने के लिए किया जा सकता था।
  • जांच में यह भी सामने आया कि आरोपी इंटरनेट और डिजिटल प्लेटफॉर्म के जरिए कट्टरपंथी विचारधारा के संपर्क में आए थे। उनके डिजिटल नेटवर्क और संपर्कों की भी गहन जांच की गई थी।

 *एनआईए ने संभाली थी जांच*

  • मामले की गंभीरता को देखते हुए केंद्र सरकार ने जांच राष्ट्रीय जांच एजेंसी (NIA) को सौंप दी थी। शुरुआती जांच पंजाब पुलिस और जम्मू-कश्मीर पुलिस ने की थी, जिसके बाद एनआईए ने पूरे नेटवर्क, डिजिटल गतिविधियों और संभावित संपर्कों की गहराई से पड़ताल की।
  • करीब आठ साल चली कानूनी प्रक्रिया के बाद एनआईए की विशेष अदालत ने तीनों आरोपियों को दोषी करार देते हुए 10-10 साल के कठोर कारावास की सजा सुनाई है।
punjabtimesnow
Author: punjabtimesnow

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