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‘ड्रग सर्वे’ या चुनावी फीडबैक? क्या है पूरा मामला जानिए सिर्फ पीटीएन पर 📢

फ्री बिजली, तीर्थ यात्रा और सरकारी योजनाओं पर फोकस; शराब को नशे की श्रेणी से बाहर रखने पर भी विवाद

✍🏻 सत्यम, रिपोर्टर, पीटीएन 

जालंधर:

  • 📰:-पंजाब सरकार द्वारा शुरू की गई पहली “ड्रग एवं सामाजिक-आर्थिक जनगणना” अब राजनीतिक विवाद का विषय बनती जा रही है। विपक्षी दलों ने आरोप लगाया है कि नशे की समस्या जानने के नाम पर सरकार लोगों से अपनी योजनाओं और कामकाज पर राय ले रही है।
  • 6 अप्रैल से शुरू हुए इस सर्वे में करीब 120 सवाल शामिल किए गए हैं, जिनमें से लगभग 40 सवाल सीधे तौर पर सरकारी योजनाओं, मुफ्त सुविधाओं और भगवंत मान सरकार के कामकाज से जुड़े बताए जा रहे हैं।
  • विपक्ष का कहना है कि यह “ड्रग सेंसस” कम और “चुनावी फीडबैक सर्वे” ज्यादा दिखाई देता है। वहीं सरकार का दावा है कि इन सवालों का उद्देश्य योजनाओं की प्रभावशीलता और जनता की जरूरतों को समझना है।

 *किन सवालों पर उठे सवाल?*

  • सर्वे में लोगों से मुफ्त बिजली योजना, सेहत बीमा, आम आदमी क्लीनिक, मुख्यमंत्री तीर्थ यात्रा योजना और सरकार के पसंदीदा कामों को लेकर सवाल पूछे जा रहे हैं।
  • इसके अलावा यह भी पूछा जा रहा है कि मान सरकार आने के बाद बिजली और सिंचाई व्यवस्था में कितना सुधार हुआ।

 *शराब को नशे में शामिल न करने पर विवाद*

  • सर्वे में सबसे बड़ा विवाद शराब की लत को लेकर खड़ा हुआ है। सर्वे में शामिल कई शिक्षकों का दावा है कि ट्रेनिंग के दौरान उन्हें निर्देश दिए गए कि शराब को नशे की श्रेणी में न गिना जाए, क्योंकि यह कानूनी रूप से बिकती है।
  • हालांकि विशेषज्ञों का कहना है कि पंजाब में शराब की लत गंभीर सामाजिक समस्या है और इसे नजरअंदाज करने से नशे की असली तस्वीर सामने नहीं आएगी।

 *सर्वे करने वालों की भी बढ़ी मुश्किलें*

  • सर्वे में लगे शिक्षकों के मुताबिक लोग खुलकर यह स्वीकार नहीं कर रहे कि उनके परिवार में कोई नशा करता है। कई जगहों पर एक परिवार का सर्वे पूरा करने में लगभग एक घंटा लग रहा है।
  • साथ ही AI आधारित ऐप खराब वॉयस रिकॉर्डिंग होने पर सर्वे रिजेक्ट कर देता है, जिससे कर्मचारियों को दोबारा लोगों के पास जाना पड़ रहा है।

 *धर्म, जाति और विदेश जाने तक के सवाल*

  • सर्वे में धर्म, जाति, गोत्र, आय, कर्ज और विदेश जाने से जुड़े सवाल भी पूछे जा रहे हैं। विपक्ष का आरोप है कि इनका ड्रग सर्वे से सीधा संबंध नहीं है।
  • फिलहाल सरकार का कहना है कि यह सर्वे पंजाब में नशे और सामाजिक हालात की जमीनी तस्वीर समझने के लिए किया जा रहा है, लेकिन राजनीतिक गलियारों में इसे लेकर बहस तेज हो गई है।

फोटो इंटरनेट के माध्यम से 

punjabtimesnow
Author: punjabtimesnow

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