America Deport Ricky के बाद टूटा विदेश का सपना, लेकिन हिम्मत नहीं हारी; परिवार संभालकर अब अपनी दुकान में रेस्टोरेंट शुरू करने की तैयारी
✍🏻 सत्यम सफरी, रिपोर्टर, पीटीएन
जालंधर। पीटीएन न्यूज
📰:-America Deport Ricky: जालंधर। विदेश जाकर जिंदगी संवारने का सपना हर किसी का पूरा हो, यह जरूरी नहीं। कई लोगों को विदेश में संघर्ष, कानूनी दिक्कतों या इमिग्रेशन संबंधी मामलों के कारण वापस लौटना पड़ता है। जालंधर के रिक्की की कहानी भी कुछ ऐसी ही है। अमेरिका जाने के करीब एक दशक बाद उसे भारत वापस लौटना पड़ा। शुरुआत में यह वापसी उसके लिए किसी बड़े झटके से कम नहीं थी, लेकिन उसने परिस्थितियों के आगे घुटने टेकने के बजाय नई शुरुआत करने का फैसला किया। रिक्की के अनुसार, वह वर्ष 2013 में एजेंट के माध्यम से अमेरिका गया था। वहां कई साल बिताने के बाद परिस्थितियां ऐसी बनीं कि उसे डिपोर्ट होकर भारत लौटना पड़ा। वर्ष 2023 में जब वह वापस आया तो उसके सामने सबसे बड़ी चुनौती खुद को दोबारा संभालने और परिवार की जिम्मेदारियां निभाने की थी।
विदेश से वापसी के बाद आसान नहीं था सफर
रिक्की की शादी अमेरिका जाने से पहले हो चुकी थी और उसके दो बच्चे भी हैं। ऐसे में विदेश में बनाया गया भविष्य का सपना टूटने के बाद भारत लौटना उसके लिए भावनात्मक रूप से काफी मुश्किल दौर था। लंबे समय तक विदेश में रहने के बाद अचानक अपने देश लौटकर नए सिरे से जिंदगी शुरू करना आसान नहीं था। हालांकि परिवार के सहयोग और अपनी मेहनत के दम पर उसने धीरे-धीरे खुद को संभाला। उसने तय किया कि बीते समय को अपनी कमजोरी बनाने के बजाय उसे अनुभव के तौर पर लेकर आगे बढ़ना है।
किराये की दुकान से शुरू किया काम
भारत लौटने के बाद रिक्की ने अपना कारोबार शुरू करने का फैसला किया। उसने किराये की दुकान लेकर वहां रेस्टोरेंट का काम शुरू किया। शुरुआत भले ही सीमित संसाधनों के साथ हुई, लेकिन मेहनत और लगातार प्रयास से उसका काम धीरे-धीरे आगे बढ़ने लगा। अब उसकी मेहनत का अगला पड़ाव अपनी दुकान है। रिक्की जल्द ही अपनी खुद की दुकान में रेस्टोरेंट शुरू करने की तैयारी कर रहा है। उसके लिए यह सिर्फ व्यापार शुरू करने की बात नहीं, बल्कि उस जिंदगी की दोबारा शुरुआत है, जिसे कभी विदेश से लौटने के बाद खत्म मान लिया गया था।
विदेश जाने वालों के लिए रिक्की की कहानी बनी सीख
रिक्की की कहानी यह बताती है कि विदेश जाना ही सफलता का एकमात्र रास्ता नहीं है। परिस्थितियां चाहे कितनी भी मुश्किल क्यों न हों, सही सोच और मेहनत के साथ अपने देश में भी नई शुरुआत की जा सकती है। वहीं, विदेश जाने की योजना बना रहे युवाओं को एजेंटों के दावों पर आंख बंद करके भरोसा करने से बचना चाहिए। वीजा, नौकरी और इमिग्रेशन प्रक्रिया से जुड़ी जानकारी संबंधित देश की आधिकारिक वेबसाइट और अधिकृत स्रोतों से जरूर जांचनी चाहिए।
Author: Satyamm safri
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