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“जिस ध्वनि से चलता था शहर, 34 साल बाद फिर सुनाई देगी क्लॉक टावर की टन-टन” 📢

1992 में तकनीकी खराबी के कारण बंद हुई थी घड़ियाल की आवाज, 16 जून से फिर गूंजेगी शहर की ऐतिहासिक पहचान

पंजाब प्रेस क्लब और सिटी ग्रुप के सहयोग से शुरू हो रहा क्लॉक टावर

✍🏻 सत्यम, रिपोर्टर, पीटीएन 

जालंधर। पीटीएन न्यूज

  • 📰:-जालंधर: शहर की ऐतिहासिक पहचान माने जाने वाले कंपनी बाग चौक स्थित क्लॉक टावर की घड़ी की आवाज एक बार फिर लोगों को सुनाई देने वाली है। करीब 34 वर्षों से बंद पड़ा घड़ियाल अब 16 जून से दोबारा शुरू किया जा रहा है, जिससे शहरवासियों की पुरानी यादें ताजा होंगी। यह क्लॉक टावर पंजाब प्रेस क्लब और सिटी ग्रुप के प्रयास से शुरू किया जा रहा है।
  • एक दौर में क्लॉक टावर केवल समय बताने का साधन नहीं, बल्कि जालंधर की पहचान हुआ करता था। मोबाइल फोन और डिजिटल घड़ियों के प्रचलन से पहले लोग इसी घड़ी की टन-टन सुनकर समय का अंदाजा लगाते थे। इसकी आवाज शहर के कई इलाकों तक पहुंचती थी और हर घंटे लोगों को समय का एहसास कराती थी।

*1992 में बंद हो गई थी घड़ियाल की आवाज*

  • तकनीकी खराबी के कारण वर्ष 1992 के आसपास क्लॉक टावर की घड़ी और घड़ियाल ने काम करना बंद कर दिया था। इसके बाद नई पीढ़ी इस ऐतिहासिक ध्वनि से अनजान रही, जबकि पुरानी पीढ़ी के लिए यह केवल एक याद बनकर रह गई।

 *1982 में रखी गई थी क्लॉक टावर की नींव*

  • क्लॉक टावर का शिलान्यास 10 फरवरी 1982 को तत्कालीन म्युनिसिपल कमिश्नर बी.एस. चौधरी (आईएएस) द्वारा किया गया था। शहर के मध्य में स्थित यह टावर जल्द ही जालंधर का प्रमुख लैंडमार्क बन गया। लोगों के लिए यह न केवल समय जानने का केंद्र था, बल्कि शहर में दिशा बताने का भी अहम संदर्भ बिंदु माना जाता था।

 *प्रेस क्लब के रूप में भी है महत्वपूर्ण पहचान*

  • समय के साथ क्लॉक टावर भवन का उपयोग विभिन्न गतिविधियों के लिए किया गया। वर्ष 2005 में यहां पंजाब प्रेस क्लब की स्थापना हुई। क्लब के जनरल मैनेजर जतिंदर पाल सिंह के अनुसार, इससे पहले भवन में एक रेस्टोरेंट संचालित होता था। वर्तमान में यह स्थान पत्रकारों की गतिविधियों, प्रेस कॉन्फ्रेंस और शहर के महत्वपूर्ण मुद्दों पर चर्चाओं का प्रमुख केंद्र बना हुआ है।

*16 जून को फिर सुनाई देगी टन-टन*

  • क्लॉक टावर के घड़ियाल को दोबारा शुरू करने की तैयारियां पूरी कर ली गई हैं। 16 जून से इसकी टन-टन की आवाज फिर शहर में गूंजेगी। लंबे समय बाद लौट रही यह ध्वनि जालंधर की विरासत और इतिहास से जुड़ी एक महत्वपूर्ण पहचान को फिर से जीवंत करेगी

punjabtimesnow
Author: punjabtimesnow

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