छठा नवरात्र
-मां कात्यायनी स्वरूपा
-महर्षि कात्यायन की पुत्री, तू वरदानों की दाती
-धन्य हैं वो जन तू जिन्हें लिख दे पाती
-तू सर्व देवी, देवों का पुंज बनकर महकी
-तू महिषासुरमर्दनी, तू फूल बन के चहकी
-मां कमल धारिणी, कृपा और कृपाण धारनी
-शुभ फल की दाती, शुभाशीष की धाती
-ऋषियों मुनियों की रक्षक, तू दुष्टों के लिए तक्षक
-नारी, कन्या और कन्या पूजन की संरक्षक
-पूजन तुम्हारा जग तेरी करे आरती
-धर्म, अर्थ और मोक्ष, तू ही है यश भारती

Author: punjabtimesnow
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