-शैलपुत्री मां गणेशाय पूज्या
-पर्वत राज हिमालय सी उच्चता
-शांति, सौम्यता और शिखरता सी शुचिता
-एक हाथ त्रिशूल, दूसरे कमल का फूल
-कोमल-हृदया मां, नहीं कहीं कोई शूल
-भक्ति और शक्ति रूप का संगम
-दुखों, कंटकों को दूर हरणी मां
-मेरी प्रथम पूजा स्वीकार करो
-मां, मेरे सर्व कष्टों को हरो।

Author: punjabtimesnow
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